भोपाल। बाढ़ से मंदसौर और नीमच से बिगड़े हालत पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार की लापरवाही के कारण हालत बिगड़े हैं। अगर समय रहते बांधों का पानी छोड़ा गया होता तो हालत नहीं बिगड़ते। शिवराज ने कहा कि मैं प्रदेश सरकार से पूछना चाहता हूं कि राहत राशि के लिए उन्होंने कितने पत्र केंद्र सरकार को अब तक लिखें हैं? क्यों नुकसान का आकलन करके अब तक केंद्र सरकार को नहीं भेजा है ? अगर केंद्र सरकार से मदद भी मैं ही मांग लूं तो फिर आप मुख्यमंत्री की कुर्सी पर क्यों बैठे हैं? कांग्रेस के जो मंत्री ये बात बोल रहे हैं, उन्हें शर्म नहीं आनी चाहिए !
शिवराज ने आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्री हमसे कह रहे हैं कि केंद्र से सहायता दिलवाएं। ये लोग संवैधानिक पदों पर बैठ हैं इन्हें ऐसी बातें शोभा नहीं देती। मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि उनके कितने मंत्री बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गए और केंद्र सरकार से उन्होंने अभी तक लिखित में सहायता मांगी है।
उन्होंने कहा कि कोई भी सरकार हो दलगत भावना से काम नहीं करती। केंद्र सरकार किसी की भी दल की हो, अगर किसी प्रदेश में कोई मुसीबत आती है तो वो हमेशा मदद करती है।
शिवराज ने कहा कि बारिश के मौसम में चार महीनों में किस डैम में कितना पानी जमा होगा, इसके नियम रहते हैं। जब प्रदेश में अतिवृष्टि होने लगी तब इस बात का सरकार ने ध्यान नहीं दिया। मौसम विभाग की चेतावनियों को भी नजरअंदाज किया गया। इससे प्रदेश में हालत बिगड़े।
जब तक आंकलन नहीं होगा, तब तक केंद्र कैसे भेजेगा राशि :मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने दतिया में कहा कि राज्य सरकार द्वारा बाढ़ के दौरान केंद्र सरकार पर सहायता नहीं देने के आरोपों पर कहा कि जब तक नुकसान का आंकलन कर नहीं भेजा जाएगा तब तक केंद्र राहत राशि कैसे दे सकता है। उन्होंने ये भी कहा कि मुख्य सचिव बाढ़ का पानी उतरने के पहले ही नुकसान का आंकलन कैसे कर रहे है।